Warning: include(domaintitles/domaintitle_wiki.exoticindiaart.php3): failed to open stream: No such file or directory in /home/exotic/newexotic/header.php3 on line 761

Warning: include(): Failed opening 'domaintitles/domaintitle_wiki.exoticindiaart.php3' for inclusion (include_path='.:/usr/lib/php:/usr/local/lib/php') in /home/exotic/newexotic/header.php3 on line 761

Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Sign In  |  Sign up
Your Cart (0)
Best Deals
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindi > आहार चिकित्सा: Cure Through Food
Subscribe to our newsletter and discounts
आहार चिकित्सा: Cure Through Food
Pages from the book
आहार चिकित्सा: Cure Through Food
Look Inside the Book
Description

पुस्तक के विषय में

अपक्व-पक्व आहार का इतिहास

आदिकाल में मनुष्य प्रकृति की गोद में रहता था। नीले आकाश के तले धरती पर सोता था। प्रकृति-प्रदत्त कैद, मूल, फल या पत्ते खाकर भी नीरोगी व दीर्घजीवी था। इन प्राकृतिक वस्तुओं से शक्ति प्राप्त करके वह इतना ऊर्जावान एवं सशक्त था कि जंगली जानवरों से तथा सर्दी, गर्मी, बरसात से मुकाबला क्यके अपनी व परिवार की रक्षा करता था।

वैदिक युग में भारतवासियों में दिन को कच्चा व रात्रि को पक्का आहार करने की परम्परा थी। कच्चे भोजन में अंगूर, अनार. खरबूजा, तरबूज, पपीता. गाजर, मूली, चुकंदर, ककड़ी, खीरा, बेर, लौकी, पता गोभी आदि बिना पकाये प्राकृतिक दशा में ही ग्रहण किये जाते थे। कच्चे पेय पदार्थ गन्ना चूसना, नारियल पानी, शहद, धारोष्ण दूध, पानी आदि लेते थे। रात्रि में पक्व भोजन लिया जाता था । जो अन्न सूर्य-रश्मियों से पक जाते थे उनको अंकुरित क्यके खाते थे, जैसे- -गेहूँ मूंग, मोठ, चना, दालें, मूंगफली आदि। यह कच्चा व पक्का आहार बिना पकाये प्राकृतिक अवस्था में ही खाया जाता था। स्वादलीलुपों ने कच्चे भोजन को दाल रोटी, चावल तथा पक्के भोजन को पूरी कचौरी, खीर, मालपुआ, पकाई गई हरी सब्जियाँ आदि में परिवर्तित क्यके भोजन के स्वरूप को बिगाड़कर स्वास्थ्य का सर्वनाश कर डाला।

कैद मूल, फल, अंकुर नीके।

दिये आनि मुनि मनहुँ अमी के ।।

(अयोध्या काण्ड 106/2)

रामचरित मानस में कैद मूल खाने का वर्णन है। शबरी ने भी रामचन्द्र जी की आवभगत बेर से ही की थी। रामचन्द्र जी ने चौदह वर्ष कैद मूल ही खाये तथा प्राकृतिक आहार खाने वाली अपनी वानरों की सेना द्वारा रावण पर विजय प्राप्त की थी।

अग्नि के आविष्कार से पहले मानव अपक्व आहार का ही सेवन करता था। परन्तु अग्नि की खोज के पश्चात् मानव ने धीरे- धीरे भोजन को पकाना शुरू कर दिया। मध्यकाल में भारत पर विदेशी आक्रमणों से यहाँ के प्राकृतिक जीवन, प्राकृतिक चिकित्सा तथा प्राकृतिक आहार पर बड़ा आघात हुआ । आइन ए अकबरी के अनुसार पालक का साग, बिरयानी, खिचड़ी, पुलाव, समोसा तन्दूरी चपाती, कुक्की, फलूदा, बरफ बनाने के स्थानीय तरीके मुगलों की देन हैं। पुर्तगालियों के आगमन के साथ भारतीय आहार में बहुत ज्यादा बदलाव आया। वे अपने साथ लाल व काली मिर्चें, राजमा, काजू आलू टमाटर, तम्बाकू, छेने की मिठाई आदि लेकर आये। अब आहार पकाने के साध-साथ मिर्च मसाले युक्त हो गया।

मध्य एशियाई लोग ज्वार, बाजरा, लोबिया तथा रोटियाँ बनाने की अनेक विधियाँ लेकर आये। भारतीय व्यंजनों पर चीन का प्रभाव भी है। लीची, शहतूत, कपूर, सोयाबीन तथा चाय इन्हीं की देन है। भारत में कॉफी अरब से आई। सेब का आगमन ब्रिटेन से हुआ। फूलगोभी, पत्तागोभी अमेरिका से आया। अमेरिका की देन विषैले खाद्य, फास्ट फूड जैसे पिज्जा, बरगर, फ्रेंच नूडल्स, ब्रेड, बिस्कुट, पेस्ट्री, केक तथा कोका कोला आदि ने हमारे पारम्परिक खान-पान को हमेशा के लिए परिवर्तित कर दिया इनमें स्वाद की तीव्रता तो है पर स्वास्थ्य की दृष्टि से ये अत्यन्त हानिकारक हैं।

हमें अपनी प्रकृति व परिवेश को समझ लेना चाहिये। प्राकृतिक आहार लेने से धन, श्रम, समय व खाद्य की बचत होगी। बाहरी रासायनिक तत्वों की मिलावट का भय भी नहीं रहेगा। प्राकृतिक आहार को चबाने से दाँत, दाढ़ स्वस्थ रहेंगे। साथ ही हम भी नीरोगी, फुर्तीले, सबल और पुष्ट रहेंगे! किन्तु युग गुजर गये हमें पक्व भोजन करते हुए, अब पूर्ण अपक्वाहार असम्भव जान पड़ता है।

 

अनुक्रमणिका

1

कच्चा-पक्का अन्न

1

2

अपक्वाहार-पक्व-आहार

3

3

आहार

5

4

युक्त आहार

7

5

सात्तिवक, राजसिक, तामसिक, आहार

8

6

क्षारीय, एवं श्लेष्मिक तत्व

9

7

आहार के प्रमुख अंग

11

8

संतुलित आहार

26

9

खाद्य पदार्थो का पाचन (कब, कहाँ और कैसे,)

28

10

बेमेल भोजन

31

11

आदर्श मेल भोजन

35

12

एकाहार एवं कल्प चिकित्सा

36

13

कैलोरी सिद्धान्त-एक भ्रम

37

14

अधिक आहार के कुप्रभाव

39

15

मादक द्रव्यों का कुप्रभाव

40

16

भोजन-प्रदूषण

54

17

तरल पदार्थो का प्रयोग

56

18

फल व सब्जियाँ

65

19

भोजन कब और कैसे खाये?

67

20

श्रम का महत्व

70

21

विश्राम का महत्व

71

22

आहार का मन पर प्रभाव

72

23

आहार ही औषधि है

74

24

जीवनी शक्ति

75

25

शाकाहारी क्यों माँसाहारी क्यों नहीं?

78

26

रोग और उसके कारण (तीव्र रोग 84 जीर्ण रोग 84)

83

27

रक्त ही जीवन है

86

28

आहार का चुनाव मध्य मार्ग

87

29

आहार सम्बन्धी कुछ अनमोल बातें

88

30

फलों का महत्व

91

31

शाक-सब्जियों का महत्व

109

32

रोगानुसार आहार

126

33

बच्चों के रोग व उपचार

188

34

निर्धारित आहार तालिकायें (आ.ता.)

190

35

विभिन्न खाद्य पर्दार्थों में खनिज तत्व, रेखा, और ऊर्जा

210-215

36

प्रश्न आपके उत्तर हमारे

216-217

37

अनकही समझना

218

Sample Page


आहार चिकित्सा: Cure Through Food

Item Code:
NZA961
Cover:
Hardcover
Edition:
2013
Publisher:
ISBN:
9788186098004
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
226
Other Details:
Weight of the Book: 300 gms
Price:
$10.00
Discounted:
$7.50   Shipping Free
You Save:
$2.50 (25%)
Look Inside the Book
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
आहार चिकित्सा: Cure Through Food

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 4257 times since 7th Sep, 2019

पुस्तक के विषय में

अपक्व-पक्व आहार का इतिहास

आदिकाल में मनुष्य प्रकृति की गोद में रहता था। नीले आकाश के तले धरती पर सोता था। प्रकृति-प्रदत्त कैद, मूल, फल या पत्ते खाकर भी नीरोगी व दीर्घजीवी था। इन प्राकृतिक वस्तुओं से शक्ति प्राप्त करके वह इतना ऊर्जावान एवं सशक्त था कि जंगली जानवरों से तथा सर्दी, गर्मी, बरसात से मुकाबला क्यके अपनी व परिवार की रक्षा करता था।

वैदिक युग में भारतवासियों में दिन को कच्चा व रात्रि को पक्का आहार करने की परम्परा थी। कच्चे भोजन में अंगूर, अनार. खरबूजा, तरबूज, पपीता. गाजर, मूली, चुकंदर, ककड़ी, खीरा, बेर, लौकी, पता गोभी आदि बिना पकाये प्राकृतिक दशा में ही ग्रहण किये जाते थे। कच्चे पेय पदार्थ गन्ना चूसना, नारियल पानी, शहद, धारोष्ण दूध, पानी आदि लेते थे। रात्रि में पक्व भोजन लिया जाता था । जो अन्न सूर्य-रश्मियों से पक जाते थे उनको अंकुरित क्यके खाते थे, जैसे- -गेहूँ मूंग, मोठ, चना, दालें, मूंगफली आदि। यह कच्चा व पक्का आहार बिना पकाये प्राकृतिक अवस्था में ही खाया जाता था। स्वादलीलुपों ने कच्चे भोजन को दाल रोटी, चावल तथा पक्के भोजन को पूरी कचौरी, खीर, मालपुआ, पकाई गई हरी सब्जियाँ आदि में परिवर्तित क्यके भोजन के स्वरूप को बिगाड़कर स्वास्थ्य का सर्वनाश कर डाला।

कैद मूल, फल, अंकुर नीके।

दिये आनि मुनि मनहुँ अमी के ।।

(अयोध्या काण्ड 106/2)

रामचरित मानस में कैद मूल खाने का वर्णन है। शबरी ने भी रामचन्द्र जी की आवभगत बेर से ही की थी। रामचन्द्र जी ने चौदह वर्ष कैद मूल ही खाये तथा प्राकृतिक आहार खाने वाली अपनी वानरों की सेना द्वारा रावण पर विजय प्राप्त की थी।

अग्नि के आविष्कार से पहले मानव अपक्व आहार का ही सेवन करता था। परन्तु अग्नि की खोज के पश्चात् मानव ने धीरे- धीरे भोजन को पकाना शुरू कर दिया। मध्यकाल में भारत पर विदेशी आक्रमणों से यहाँ के प्राकृतिक जीवन, प्राकृतिक चिकित्सा तथा प्राकृतिक आहार पर बड़ा आघात हुआ । आइन ए अकबरी के अनुसार पालक का साग, बिरयानी, खिचड़ी, पुलाव, समोसा तन्दूरी चपाती, कुक्की, फलूदा, बरफ बनाने के स्थानीय तरीके मुगलों की देन हैं। पुर्तगालियों के आगमन के साथ भारतीय आहार में बहुत ज्यादा बदलाव आया। वे अपने साथ लाल व काली मिर्चें, राजमा, काजू आलू टमाटर, तम्बाकू, छेने की मिठाई आदि लेकर आये। अब आहार पकाने के साध-साथ मिर्च मसाले युक्त हो गया।

मध्य एशियाई लोग ज्वार, बाजरा, लोबिया तथा रोटियाँ बनाने की अनेक विधियाँ लेकर आये। भारतीय व्यंजनों पर चीन का प्रभाव भी है। लीची, शहतूत, कपूर, सोयाबीन तथा चाय इन्हीं की देन है। भारत में कॉफी अरब से आई। सेब का आगमन ब्रिटेन से हुआ। फूलगोभी, पत्तागोभी अमेरिका से आया। अमेरिका की देन विषैले खाद्य, फास्ट फूड जैसे पिज्जा, बरगर, फ्रेंच नूडल्स, ब्रेड, बिस्कुट, पेस्ट्री, केक तथा कोका कोला आदि ने हमारे पारम्परिक खान-पान को हमेशा के लिए परिवर्तित कर दिया इनमें स्वाद की तीव्रता तो है पर स्वास्थ्य की दृष्टि से ये अत्यन्त हानिकारक हैं।

हमें अपनी प्रकृति व परिवेश को समझ लेना चाहिये। प्राकृतिक आहार लेने से धन, श्रम, समय व खाद्य की बचत होगी। बाहरी रासायनिक तत्वों की मिलावट का भय भी नहीं रहेगा। प्राकृतिक आहार को चबाने से दाँत, दाढ़ स्वस्थ रहेंगे। साथ ही हम भी नीरोगी, फुर्तीले, सबल और पुष्ट रहेंगे! किन्तु युग गुजर गये हमें पक्व भोजन करते हुए, अब पूर्ण अपक्वाहार असम्भव जान पड़ता है।

 

अनुक्रमणिका

1

कच्चा-पक्का अन्न

1

2

अपक्वाहार-पक्व-आहार

3

3

आहार

5

4

युक्त आहार

7

5

सात्तिवक, राजसिक, तामसिक, आहार

8

6

क्षारीय, एवं श्लेष्मिक तत्व

9

7

आहार के प्रमुख अंग

11

8

संतुलित आहार

26

9

खाद्य पदार्थो का पाचन (कब, कहाँ और कैसे,)

28

10

बेमेल भोजन

31

11

आदर्श मेल भोजन

35

12

एकाहार एवं कल्प चिकित्सा

36

13

कैलोरी सिद्धान्त-एक भ्रम

37

14

अधिक आहार के कुप्रभाव

39

15

मादक द्रव्यों का कुप्रभाव

40

16

भोजन-प्रदूषण

54

17

तरल पदार्थो का प्रयोग

56

18

फल व सब्जियाँ

65

19

भोजन कब और कैसे खाये?

67

20

श्रम का महत्व

70

21

विश्राम का महत्व

71

22

आहार का मन पर प्रभाव

72

23

आहार ही औषधि है

74

24

जीवनी शक्ति

75

25

शाकाहारी क्यों माँसाहारी क्यों नहीं?

78

26

रोग और उसके कारण (तीव्र रोग 84 जीर्ण रोग 84)

83

27

रक्त ही जीवन है

86

28

आहार का चुनाव मध्य मार्ग

87

29

आहार सम्बन्धी कुछ अनमोल बातें

88

30

फलों का महत्व

91

31

शाक-सब्जियों का महत्व

109

32

रोगानुसार आहार

126

33

बच्चों के रोग व उपचार

188

34

निर्धारित आहार तालिकायें (आ.ता.)

190

35

विभिन्न खाद्य पर्दार्थों में खनिज तत्व, रेखा, और ऊर्जा

210-215

36

प्रश्न आपके उत्तर हमारे

216-217

37

अनकही समझना

218

Sample Page


Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy
Based on your browsing history
Loading... Please wait

Items Related to आहार चिकित्सा: Cure Through Food (Hindi | Books)

Foods that Heal: Revelation of foods that cure various Ailments, Disorders and Niggles
Item Code: IDF580
$14.00$10.50
You save: $3.50 (25%)
Add to Cart
Buy Now
Nutritive Value of Indian Foods
Item Code: NAK369
$25.00$18.75
You save: $6.25 (25%)
SOLD
Your Food and You
by K.T. Achaya
Paperback (Edition: 2004)
National Book Trust
Item Code: IDJ210
$12.00$9.00
You save: $3.00 (25%)
Add to Cart
Buy Now
Foods That Heal
by Dr. Ganesh Narayan Chauhan
Paperback (Edition: 2010)
Popular Book Depot
Item Code: IHL323
$23.50$17.62
You save: $5.88 (25%)
Add to Cart
Buy Now
Ayurveda Aahar (Food/Diet)
Item Code: IHL193
$22.00$16.50
You save: $5.50 (25%)
Add to Cart
Buy Now
Discover the amazing powers of herbs: Spirulina The Most Powerful Food on Earth
by B.V. Umesh
Paperback (Edition: 2002)
Unicorn Books Pvt. Ltd.
Item Code: IDF172
$6.50$4.88
You save: $1.62 (25%)
Add to Cart
Buy Now
Your Food And Its Utilisation (Set of 5 Books)
Paperback (Edition: 2010)
Indira Gandhi National Open University
Item Code: NAG293
$55.00$41.25
You save: $13.75 (25%)
Add to Cart
Buy Now
Foods That Heal: The Natural Way to Good Health
Deal 20% Off
by H.K. Bakhru
Paperback (Edition: 2005)
Orient Paperbacks
Item Code: IDF016
$13.00$7.80
You save: $5.20 (20 + 25%)
Add to Cart
Buy Now
Raw Guru (Holistic Healing With Raw and Living Foods)
by Philip Clegg
Paperback (Edition: 2011)
Rupa Publications India Pvt.Ltd
Item Code: NAD947
$20.00$15.00
You save: $5.00 (25%)
Add to Cart
Buy Now
Healing with Food: A Complete Source for Healthy Eating
Item Code: IDJ782
$25.00$18.75
You save: $6.25 (25%)
Add to Cart
Buy Now
Diet In Diseases: Therapeutic Foods that cure and Prevent diseases
by Sunita Pant Bansal
Paperback (Edition: 2005)
Pustak Mahal
Item Code: IDF791
$12.00$9.00
You save: $3.00 (25%)
Add to Cart
Buy Now
Food Principles For Healthy Living
Deal 20% Off
Item Code: NAC339
$15.00$9.00
You save: $6.00 (20 + 25%)
Add to Cart
Buy Now
Testimonials
Thank-you for the increased discounts this holiday season. I wanted to take a moment to let you know you have a phenomenal collection of books on Indian Philosophy, Tantra and Yoga and commend you and the entire staff at Exotic India for showcasing the best of what our ancient civilization has to offer to the world.
Praveen
I don't know how Exotic India does it but they are amazing. Whenever I need a book this is the first place I shop. The best part is they are quick with the shipping. As always thank you!!!
Shyam Maharaj
Great selection. Thank you.
William, USA
appreciate being able to get this hard to find book from this great company Exotic India.
Mohan, USA
Both Om bracelets are amazing. Thanks again !!!
Fotis, Greece
Thank you for your wonderful website.
Jan, USA
Awesome collection! Certainly will recommend this site to friends and relatives. Appreciate quick delivery.
Sunil, UAE
Thank you so much, I'm honoured and grateful to receive such a beautiful piece of art of Lakshmi. Please congratulate the artist for his incredible artwork. Looking forward to receiving her on Haida Gwaii, Canada. I live on an island, surrounded by water, and feel Lakshmi's present all around me.
Kiki, Canada
Nice package, same as in Picture very clean written and understandable, I just want to say Thank you Exotic India Jai Hind.
Jeewan, USA
I received my order today. When I opened the FedEx packet, I did not expect to find such a perfectly wrapped package. The book has arrived in pristine condition and I am very impressed by your excellent customer service. It was my pleasure doing business with you and I look forward to many more transactions with your company. Again, many thanks for your fantastic customer service! Keep up the good work.
Sherry, Canada
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2019 © Exotic India