Warning: include(domaintitles/domaintitle_wiki.exoticindiaart.php3): failed to open stream: No such file or directory in /home/exotic/newexotic/header.php3 on line 751

Warning: include(): Failed opening 'domaintitles/domaintitle_wiki.exoticindiaart.php3' for inclusion (include_path='.:/usr/lib/php:/usr/local/lib/php') in /home/exotic/newexotic/header.php3 on line 751

Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Sign In  |  Sign up
Your Cart (0)
Best Deals
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindi > हिंदू धर्म > गीता प्रेस > पार्वती मंगल: Parvati Mangal of Tulsidas (With Hindi Translation)
Subscribe to our newsletter and discounts
पार्वती मंगल: Parvati Mangal of Tulsidas (With Hindi Translation)
पार्वती मंगल: Parvati Mangal of Tulsidas (With Hindi Translation)
Description

प्रथम संस्करणका नम्र निवेदन

 

जानकी मंगलमें जिस प्रकार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्रीरामके साथ जगज्जननी जानकीके मंगलमय विवाहोत्सवका वर्णन है, उसी प्रकार पार्वती मंगलमें प्रात:स्मरणीय गोस्वामीजीने देवाधिदेव भगवान् शंकरके द्वारा जगदम्बा पार्वतीके कल्याणमय पाणिग्रहणका काव्यमय एवं रसमय चित्रण किया हैलक्ष्मी नारायण, सीता राम एवं राधा कृष्ण अथवा रुक्मिणी कृष्णकी भांति ही गौरी शंकर भी हमारे परमाराध्य एवं परम वन्दनीय आदर्श दम्पति हैंलक्ष्मी, सीता, राधा एवं रुक्मिणीकी भांति ही गिरिराजकिशोरी पार्वती भी अनादि कालसे हमारी पतिव्रताओंके लिये परमादर्श रही हैं; इसीलिये हिंदू कन्याएँ जबसे वे होश सँभालती हैं, तभीसे मनोऽभिलषित वस्की प्राप्तिके लिये गौरीपूजन किया करती हैंजगज्जननी जानकी तथा रुक्मिणी भी स्वयंवरसे पूर्व गिरिजा पूजनके लिये महलसे बाहर जाती हैं तथा वृषभानुकिशोरी भी अन्य गोप कन्याओंके साथ नन्दकुमारको पतिरूपमें प्राप्त करनेके लिये हेमन्त ऋतुमें बड़े सबेरे यमुना स्नान करके वहीं यमुना तटपर एक मासतक भगवती कात्यायनीकी बालुकामयी प्रतिमा बनाकर उनकी पूजा करती हैं

जगदम्बा पार्वतीने भगवान् शंकर जैसे निरन्तर समाधिमें लीन रहनेवाले, परम उदासीन वीतराग शिरोमणिको कान्तरूपमें प्राप्त करनेके लिये कैसी कठोर साधना की, कैसे कैसे क्लेश सहे, किस प्रकार उनके आराध्यदेवने उनके प्रेमकी परीक्षा ली और अन्तमें कैसे उनकी अदम्य निष्ठाकी विजय हुई यह इतिहास एक प्रकाशस्तम्भकी भांति भारतीय बालिकाओंको पातिव्रत्यके कठिन मार्गपर अडिगरूपसे चलनेके लिये प्रबल प्रेरणा और उत्साह देता रहा है और देता रहेगापरम पूज्य गोस्वामीजीने अपनी अमर लेखनीके द्वारा उनकी तपस्या एवं अनन्य निष्ठाका बड़ा ही हृदयग्राही एवं मनोरम चित्र खींचा है, जो पाश्चात्य शिक्षाके प्रभावसे पाश्चात्य आदर्शोंके पीछे पागल हुई हमारी नवशिक्षिता कुमारियोंके लिये एक मनन करने योग्य सामग्री उपस्थित करता हैरामचरितमानसकी भांति यहों भी शिव बरातके वर्णनमें गोस्वामीजीने हास्यरसका अत्यन्त मधुर पुट दिया है और अन्तमें विवाह एवं विदाईका बड़ा ही मार्मिक एवं रोचक वर्णन करके इस छोटे से काव्यका उपसंहार किया है

गोस्वामीजीकी अन्य रचनाओंकी भांति उनकी यह अमर कृति भी काव्य रस एवं भक्ति रससे छलक रही हैइसकी अनुपम माधुरीका आस्वादन करके सभी लोग कृतार्थ हो सकें इसी भावनासे हमारे स्वर्गीय श्रीइन्द्रदेवनारायणजीने इसकी सुन्दर टीका लिखी थी, जो वर्षोंसे अप्रकाशित पड़ी थीहमारे प्रिय मुनिलालजी (वर्तमान स्वामीजी श्रीसनातनदेवजी) ने बड़े ही प्रेम एवं मनोयोगपूर्वक उसका संशोधन भी कर दिया था; किंतु कई कारणोंसे हमलोग उसे इच्छा रहते भी छाप नहीं पाये थेभगवान् गौरी शंकरकी महती कृपासे आज हम उसे मूलसहित प्रकाशित कर प्रेमी पाठक पाठिकाओंकी सेवामें प्रस्तुत कर रहे हैंआशा है, गोस्वामीजीकी अन्य मधुरातिमधुर कृतियोंकी भांति इसे भी जनता आदरपूर्वक अपनायेगी और भगवती उमा एवं भगवान् उमानाथके इस परमपावन मंगलमय चरित्रका अनुशीलन करके अपने अन्तःकरणको पवित्र एवं भक्तिरससे आप्लावित करेगीअज्ञान अथवा दृष्टिदोषसे मूल अथवा अनुवादमें जहाँ जहाँ भूलें दृष्टिगोचर हों, विज्ञ पाठक उन्हें कृपापूर्वक सुधार लें और हमें भी सूचित कर दें, ताकि उनका अगले संस्करणमें मार्जन किया जा सके

 

Sample Page

 

 

पार्वती मंगल: Parvati Mangal of Tulsidas (With Hindi Translation)

Item Code:
GPA147
Cover:
Paperback
Edition:
2013
ISBN:
9788129305053
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
32
Other Details:
Weight of the Book: 30 gms
Price:
$3.00   Shipping Free
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
पार्वती मंगल: Parvati Mangal of Tulsidas (With Hindi Translation)

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 30721 times since 11th Jun, 2019

प्रथम संस्करणका नम्र निवेदन

 

जानकी मंगलमें जिस प्रकार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्रीरामके साथ जगज्जननी जानकीके मंगलमय विवाहोत्सवका वर्णन है, उसी प्रकार पार्वती मंगलमें प्रात:स्मरणीय गोस्वामीजीने देवाधिदेव भगवान् शंकरके द्वारा जगदम्बा पार्वतीके कल्याणमय पाणिग्रहणका काव्यमय एवं रसमय चित्रण किया हैलक्ष्मी नारायण, सीता राम एवं राधा कृष्ण अथवा रुक्मिणी कृष्णकी भांति ही गौरी शंकर भी हमारे परमाराध्य एवं परम वन्दनीय आदर्श दम्पति हैंलक्ष्मी, सीता, राधा एवं रुक्मिणीकी भांति ही गिरिराजकिशोरी पार्वती भी अनादि कालसे हमारी पतिव्रताओंके लिये परमादर्श रही हैं; इसीलिये हिंदू कन्याएँ जबसे वे होश सँभालती हैं, तभीसे मनोऽभिलषित वस्की प्राप्तिके लिये गौरीपूजन किया करती हैंजगज्जननी जानकी तथा रुक्मिणी भी स्वयंवरसे पूर्व गिरिजा पूजनके लिये महलसे बाहर जाती हैं तथा वृषभानुकिशोरी भी अन्य गोप कन्याओंके साथ नन्दकुमारको पतिरूपमें प्राप्त करनेके लिये हेमन्त ऋतुमें बड़े सबेरे यमुना स्नान करके वहीं यमुना तटपर एक मासतक भगवती कात्यायनीकी बालुकामयी प्रतिमा बनाकर उनकी पूजा करती हैं

जगदम्बा पार्वतीने भगवान् शंकर जैसे निरन्तर समाधिमें लीन रहनेवाले, परम उदासीन वीतराग शिरोमणिको कान्तरूपमें प्राप्त करनेके लिये कैसी कठोर साधना की, कैसे कैसे क्लेश सहे, किस प्रकार उनके आराध्यदेवने उनके प्रेमकी परीक्षा ली और अन्तमें कैसे उनकी अदम्य निष्ठाकी विजय हुई यह इतिहास एक प्रकाशस्तम्भकी भांति भारतीय बालिकाओंको पातिव्रत्यके कठिन मार्गपर अडिगरूपसे चलनेके लिये प्रबल प्रेरणा और उत्साह देता रहा है और देता रहेगापरम पूज्य गोस्वामीजीने अपनी अमर लेखनीके द्वारा उनकी तपस्या एवं अनन्य निष्ठाका बड़ा ही हृदयग्राही एवं मनोरम चित्र खींचा है, जो पाश्चात्य शिक्षाके प्रभावसे पाश्चात्य आदर्शोंके पीछे पागल हुई हमारी नवशिक्षिता कुमारियोंके लिये एक मनन करने योग्य सामग्री उपस्थित करता हैरामचरितमानसकी भांति यहों भी शिव बरातके वर्णनमें गोस्वामीजीने हास्यरसका अत्यन्त मधुर पुट दिया है और अन्तमें विवाह एवं विदाईका बड़ा ही मार्मिक एवं रोचक वर्णन करके इस छोटे से काव्यका उपसंहार किया है

गोस्वामीजीकी अन्य रचनाओंकी भांति उनकी यह अमर कृति भी काव्य रस एवं भक्ति रससे छलक रही हैइसकी अनुपम माधुरीका आस्वादन करके सभी लोग कृतार्थ हो सकें इसी भावनासे हमारे स्वर्गीय श्रीइन्द्रदेवनारायणजीने इसकी सुन्दर टीका लिखी थी, जो वर्षोंसे अप्रकाशित पड़ी थीहमारे प्रिय मुनिलालजी (वर्तमान स्वामीजी श्रीसनातनदेवजी) ने बड़े ही प्रेम एवं मनोयोगपूर्वक उसका संशोधन भी कर दिया था; किंतु कई कारणोंसे हमलोग उसे इच्छा रहते भी छाप नहीं पाये थेभगवान् गौरी शंकरकी महती कृपासे आज हम उसे मूलसहित प्रकाशित कर प्रेमी पाठक पाठिकाओंकी सेवामें प्रस्तुत कर रहे हैंआशा है, गोस्वामीजीकी अन्य मधुरातिमधुर कृतियोंकी भांति इसे भी जनता आदरपूर्वक अपनायेगी और भगवती उमा एवं भगवान् उमानाथके इस परमपावन मंगलमय चरित्रका अनुशीलन करके अपने अन्तःकरणको पवित्र एवं भक्तिरससे आप्लावित करेगीअज्ञान अथवा दृष्टिदोषसे मूल अथवा अनुवादमें जहाँ जहाँ भूलें दृष्टिगोचर हों, विज्ञ पाठक उन्हें कृपापूर्वक सुधार लें और हमें भी सूचित कर दें, ताकि उनका अगले संस्करणमें मार्जन किया जा सके

 

Sample Page

 

 

Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy
Based on your browsing history
Loading... Please wait

Items Related to पार्वती मंगल: Parvati Mangal of Tulsidas (With... (Hindi | Books)

Vinaya Patrika (Vol. II from Complete Works of Goswami Tulsidas)
Deal 20% Off
Item Code: ILL64
$30.00$24.00
You save: $6.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Shri Ramacharitamanasa (Tulasidasa's Ramayana)
Deal 20% Off
Item Code: NAF978
$45.00$36.00
You save: $9.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Lakshmi
by Chitralekha Singh & Prem Nath
Paperback (Edition: 2011)
Indiana Books
Item Code: NAO824
$12.00
Add to Cart
Buy Now
Lila (Set of 6 Volumes)
by Vanamali
Hardcover (Edition: 2006,08,10,16,2017)
Aryan Books International
Item Code: NAK404
$155.00
Add to Cart
Buy Now
Sacred Songs of India (Set of 10 Volumes)
by V.K. Subramanian
Hardcover (Edition: 1996)
Abhinav Publications
Item Code: NAG121
$175.00
SOLD
Finding Radha - The Quest for Love
Item Code: NAO581
$22.00
Add to Cart
Buy Now
Hindu Fasts, Festivals and Ceremonies
Item Code: IDK939
$20.00
Add to Cart
Buy Now
A Mystery
Item Code: NAC547
$30.00
Add to Cart
Buy Now
Testimonials
I am very happy with your service, and have now added a web page recommending you for those interested in Vedic astrology books: https://www.learnastrologyfree.com/vedicbooks.htm Many blessings to you.
Hank, USA
As usual I love your merchandise!!!
Anthea, USA
You have a fine selection of books on Hindu and Buddhist philosophy.
Walter, USA
I am so very grateful for the many outstanding and interesting books you have on offer.
Hans-Krishna, Canada
Appreciate your interest in selling the Vedantic books, including some rare books. Thanks for your service.
Dr. Swaminathan, USA
I received my order today, very happy with the purchase and thank you very much for the lord shiva greetings card.
Rajamani, USA
I have a couple of your statues in your work is really beautiful! Your selection of books and really everything else is just outstanding! Namaste, and many blessings.
Kimberly
Thank you once again for serving life.
Gil, USa
Beautiful work on the Ganesha statue I ordered. Prompt delivery. I would order from them again and recommend them.
Jeff Susman
Awesome books collection. lots of knowledge available on this website
Pankaj, USA
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2019 © Exotic India