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Books > Hindu > Ramayana > Tulsidas > तुलसी राम कथा: Tulsidas' Rama Katha
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तुलसी राम कथा: Tulsidas' Rama Katha
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तुलसी राम कथा: Tulsidas' Rama Katha
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Description

प्रकाशकीय

हमारे देश में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जिसने राम का नाम न सुना हो और रामकथा से परिचित न हो। अपने देश में ही क्यों, संसार के अनेक देशों में राम-भक्ति की धारा प्रवाहित है। दक्षिण-पूर्व एशिया में तो समूचा लोकजीवन राम की भक्ति से ओतप्रोत है। सच बात तो यह है कि राम के नाम में और उनके चरित्र में कुछ ऐसा जादू है कि उनकी कथा को एक बार पढ़ लेने से तृप्ति नहीं होती, उसे बार-बार पढ़ने को जी चाहता है।

इस पुस्तक के चार भागों में हमने राम के जीवन के प्रमुख प्रसंगों को लेकर सारी कथा इस प्रकार दीं है कि सामान्य पढ़े-लिखे पाठक भी इसे आसानी से समझ सकते हैं। बचि-बीच में चुनी हुई चौपाइयाँ तथा दोहे भी दे दिये हैं, जिससे यह पुस्तक और भी सरस तथा रोचक बन गई है।

हमें पूरा विश्वास है कि सभी वर्गों और क्षेत्रों के पाठक इस पुस्तक का पूरा लाभ न केवल स्वयं लेंगे, अपितु दूसरों को भी लेने की प्रेरणा देंगे।

 

अनुक्रमण

राम-जन्म

1

जन्म

9

2

नामकरण

14

3

बाल-लीला

16

4

विद्याभ्यास

19

5

विश्वामित्र की माँग

21

6

यज्ञ-रक्षा

26

7

जनकपुरी कीं ओर

29

8

नगरी में स्वागत

32

9

प्रथम दर्शन

35

10

स्वयंवर में

38

11

धनुष-भंग

41

12

परशुराम-संवाद

44

13

सुखद-संवाद

50

14

बारात की शोभा

52

15

जनकपुरी में स्वागत

55

16

विवाह-संस्कार

56

17

उसी मण्डप में

59

18

सत्कार

61

19

हृदय-स्पर्शी विदाई

62

20

वापसी

64

21

अयोध्यापुरी में

65

राम-वनगमन

22

राजतिलक का विचार

71

23

मन्थरा की कुटिलता

73

24

कैकेयी का दुराग्रह

75

25

पुत्र की कर्तव्य-निष्ठा

78

26

सीताजी को रोकने का प्रयत्न

82

27

लक्ष्मण भी तैयार हो गये

84

28

माता-पिता और पुरवासियों की वेदना

88

29

प्रस्थान

89

30

निषाद-मिलन

91

31

केवट की अनोखी चाह

93

32

ऋषि-मुनियों के आश्रम में

94

33

दशरथ-मरण

99

34

चित्रकूट में वास

102

35

लक्ष्मण का कोप

105

36

भरत-मिलाप

106

37

राम नहीं लौटे

110

38

विदाई

113

39

अनुसूया का उपदेश

115

40

राम की प्रतिज्ञा

119

41

मुनि अगस्त से भेंट

122

42

शूर्पणखा का प्रपंच

128

43

खर-दूषण-वध

131

44

रावण के दरबार में

135

सीता-हरण

45

मारीच और रावण का प्रपंच

141

46

कंचन-मृग के पीछे

143

47

सीता-हरण

146

48

जटायु की वीरगति

148

49

सीता के वियोग में

151

50

शबरी की भक्ति

153

51

नारदजी को उपदेश

157

52

राम-हनुमान मिलन

161

53

सुग्रीव से भेंट

165

54

बालि-वध

171

55

वर्षा-वर्णन

178

56

शरद-वर्णन

182

57

सुग्रीव पर कोप

184

58

सीता की खोज में

188

59

हनुमान का साहस

191

60

भक्त विभीषण से भेंट

194

61

रावण की धमकी

197

62

सीता को ढाढ़स

200

63

अशोक वाटिका में युद्ध

204

64

रावण की सभा में

206

65

लंका दहन

212

66

हनुमान की वापसी

216

67

सीता की दशा का वर्णन

220

68

लंका को ओर

223

लंका-विजय

69

मंदोदरी की सलाह

227

70

विभीषण का अपमान

228

71

शरणागत पर कृपा

233

72

समुद्र पर पुल

238

73

अंगद-रावण-संवाद

241

74

अंगद का पैर जमाना

246

75

लंका पर चढ़ाई

249

76

युद्धारम्भ

251

77

मेघनाद का युद्ध-कौशल

254

78

लक्ष्मण पर शक्ति-प्रयोग

266

79

कालनेमि का माया-जाल

269

80

भरत को भ्रम

263

81

राम का विलाप

266

82

लक्ष्मण की मूर्च्छा-भंग

268

83

कुम्भकरण-वध

270

84

मेघनाद-वध

273

85

रावण से युद्ध

277

86

रावण-वध

282

87

विभीषण का राजतिलक

287

88

सीताजी का आगमन

288

89

अयोध्या को प्रस्थान

290

90

मार्ग में

293

91

हनुमान भरत से मिले

296

92

आनन्दमग्न अयोध्या

300

93

मंगल-मिलन

302

94

राम का राजतिलक

307

95

मित्रों को विदाई

310

Sample Page


तुलसी राम कथा: Tulsidas' Rama Katha

Deal 20% Off
Item Code:
NZA989
Cover:
Paperback
Edition:
2017
ISBN:
8173091854
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
312(Throughout B/W Illustrations)
Other Details:
Weight of the Book: 340 gms
Price:
$13.00
Discounted:
$10.40   Shipping Free
You Save:
$2.60 (20%)
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तुलसी राम कथा: Tulsidas' Rama Katha
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प्रकाशकीय

हमारे देश में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जिसने राम का नाम न सुना हो और रामकथा से परिचित न हो। अपने देश में ही क्यों, संसार के अनेक देशों में राम-भक्ति की धारा प्रवाहित है। दक्षिण-पूर्व एशिया में तो समूचा लोकजीवन राम की भक्ति से ओतप्रोत है। सच बात तो यह है कि राम के नाम में और उनके चरित्र में कुछ ऐसा जादू है कि उनकी कथा को एक बार पढ़ लेने से तृप्ति नहीं होती, उसे बार-बार पढ़ने को जी चाहता है।

इस पुस्तक के चार भागों में हमने राम के जीवन के प्रमुख प्रसंगों को लेकर सारी कथा इस प्रकार दीं है कि सामान्य पढ़े-लिखे पाठक भी इसे आसानी से समझ सकते हैं। बचि-बीच में चुनी हुई चौपाइयाँ तथा दोहे भी दे दिये हैं, जिससे यह पुस्तक और भी सरस तथा रोचक बन गई है।

हमें पूरा विश्वास है कि सभी वर्गों और क्षेत्रों के पाठक इस पुस्तक का पूरा लाभ न केवल स्वयं लेंगे, अपितु दूसरों को भी लेने की प्रेरणा देंगे।

 

अनुक्रमण

राम-जन्म

1

जन्म

9

2

नामकरण

14

3

बाल-लीला

16

4

विद्याभ्यास

19

5

विश्वामित्र की माँग

21

6

यज्ञ-रक्षा

26

7

जनकपुरी कीं ओर

29

8

नगरी में स्वागत

32

9

प्रथम दर्शन

35

10

स्वयंवर में

38

11

धनुष-भंग

41

12

परशुराम-संवाद

44

13

सुखद-संवाद

50

14

बारात की शोभा

52

15

जनकपुरी में स्वागत

55

16

विवाह-संस्कार

56

17

उसी मण्डप में

59

18

सत्कार

61

19

हृदय-स्पर्शी विदाई

62

20

वापसी

64

21

अयोध्यापुरी में

65

राम-वनगमन

22

राजतिलक का विचार

71

23

मन्थरा की कुटिलता

73

24

कैकेयी का दुराग्रह

75

25

पुत्र की कर्तव्य-निष्ठा

78

26

सीताजी को रोकने का प्रयत्न

82

27

लक्ष्मण भी तैयार हो गये

84

28

माता-पिता और पुरवासियों की वेदना

88

29

प्रस्थान

89

30

निषाद-मिलन

91

31

केवट की अनोखी चाह

93

32

ऋषि-मुनियों के आश्रम में

94

33

दशरथ-मरण

99

34

चित्रकूट में वास

102

35

लक्ष्मण का कोप

105

36

भरत-मिलाप

106

37

राम नहीं लौटे

110

38

विदाई

113

39

अनुसूया का उपदेश

115

40

राम की प्रतिज्ञा

119

41

मुनि अगस्त से भेंट

122

42

शूर्पणखा का प्रपंच

128

43

खर-दूषण-वध

131

44

रावण के दरबार में

135

सीता-हरण

45

मारीच और रावण का प्रपंच

141

46

कंचन-मृग के पीछे

143

47

सीता-हरण

146

48

जटायु की वीरगति

148

49

सीता के वियोग में

151

50

शबरी की भक्ति

153

51

नारदजी को उपदेश

157

52

राम-हनुमान मिलन

161

53

सुग्रीव से भेंट

165

54

बालि-वध

171

55

वर्षा-वर्णन

178

56

शरद-वर्णन

182

57

सुग्रीव पर कोप

184

58

सीता की खोज में

188

59

हनुमान का साहस

191

60

भक्त विभीषण से भेंट

194

61

रावण की धमकी

197

62

सीता को ढाढ़स

200

63

अशोक वाटिका में युद्ध

204

64

रावण की सभा में

206

65

लंका दहन

212

66

हनुमान की वापसी

216

67

सीता की दशा का वर्णन

220

68

लंका को ओर

223

लंका-विजय

69

मंदोदरी की सलाह

227

70

विभीषण का अपमान

228

71

शरणागत पर कृपा

233

72

समुद्र पर पुल

238

73

अंगद-रावण-संवाद

241

74

अंगद का पैर जमाना

246

75

लंका पर चढ़ाई

249

76

युद्धारम्भ

251

77

मेघनाद का युद्ध-कौशल

254

78

लक्ष्मण पर शक्ति-प्रयोग

266

79

कालनेमि का माया-जाल

269

80

भरत को भ्रम

263

81

राम का विलाप

266

82

लक्ष्मण की मूर्च्छा-भंग

268

83

कुम्भकरण-वध

270

84

मेघनाद-वध

273

85

रावण से युद्ध

277

86

रावण-वध

282

87

विभीषण का राजतिलक

287

88

सीताजी का आगमन

288

89

अयोध्या को प्रस्थान

290

90

मार्ग में

293

91

हनुमान भरत से मिले

296

92

आनन्दमग्न अयोध्या

300

93

मंगल-मिलन

302

94

राम का राजतिलक

307

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मित्रों को विदाई

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